Wednesday, 25 November 2015

फूल इक गुलाब का,
बेशक नन्हा सा, छोटू सा,
पर अपने तीखे नुकीले कंटीले सिंहासन पे
अभिमानी शहंशाह सा बैठा,
फिर भी अपनी मखमली गुलाबी पत्तियों में
कितनी मीठी खुशबू समेटे,
बिलकुल ज़िन्दगी की तरह
कुछ-कुछ मीठी, कुछ-कुछ कड़वी,
कुछ-कुछ दिन-रात की तरह
कभी सुनहरा दिन, कभी गहराता अँधियारा
कभी काले बादल तो कभी रुपहली चांदनी।
क्या मायूस हो जाएँ कुछ नए उगते काँटों से, 
अंधियारे से, घने काले बादलों से,
या मुस्कुराते रहें मदमस्त हो कर
इसकी मनमोहिनी खूबसूरती और खुशबू से?

Wednesday, 4 November 2015

अबकी बार बिहार में किसकी सरकार?

अबकी बार, जनता करे बस एक गुहार,
भड़काऊ भाषण, विज्ञापन, झूठा प्रचार, 
अब ये सब गाली-गलौज, नौटंकी बंद कर दे यार,
क्या है जनता की इच्छा, कर ले ज़रा विचार,
आज चाहिए सिर्फ सुरक्षा, शिक्षा, भोजन भरपूर, 
स्वास्थ्य, पक्का मकान, नौकरी और व्यापार,
जाती, धर्म, गाय, भैंस, बकरी के नाम पर 
ना आपस में लड़वाओ, ना बनाओ उल्लू बार बार,

अदरवाइज़ इवेन आई डोंट केयर हू यू आर 
जस्ट शट अप एंड गेट लॉस्ट फ्रॉम हियर!